Wednesday, August 3, 2011

जहाज

हमारी सुरक्षा मजबूत हे
तभी तो जहाज साबुत हे
बिना रडार काम चलता हे
लोकतंत्र में भ्रष्टाचार सब तरफ मुमकिन हे
सब समुद्री नमक के शोकिन हे
आप में हो हिम्मत तो सड़क पर चल कर दिखाइए
पर समुन्दर में बे रोक टोक चले आइये
नाव में जो मज्जा
वो विदेशी बोट में कहाँ ?
खरीदी हे मगर
वो जोश हैं कहाँ ?
आइये नमन करें
वंदन करें
हमारी आजादी सुरक्षित हे

Friday, December 24, 2010

तुम मुस्कुराते हो
हम दफ़न हो जाते हैं
स्कैम के पुतले
अमर हो जाते हैं

सारा मीडिया तुमाहरे पीछे
ठगा हुआ सा कल हमारे आगे

तुम राजा हम रंक
हँसते हँसते झेल रहे
नागिन के डंक
लोकतंत्र में नाग
फन फैलाये
कोई बदनाम हो
किसी को जवानी आये

प्याज के छिलके उतर रहे हैं
सुना हे सबके पते
नगर वधु की डायरी में मिल रहे हैं

हवा में फरमाया गया इश्क
वो भी पकड़ा गया
अब तो डीएनए की जांच जरुरी हे
बुढा पे ये नई मजबूरी हे

पटरी पर समझोते हो रहे हैं
सड़क पर नवजात छोड़े जा रहे हैं
हवाई जहाज हिचकोले खा रहे हैं
वर्त्तमान मुस्कुरा रहा हे
भविष्य दफ़न हो रहा हैं

Friday, November 12, 2010

आदर्श जमाना

बराक ओबामा आये
मुस्कुराये , हात मिलाया
सपत्नी सकुशल चले गए
आदर्श के पुतले
अभी यहाँ जिन्दा हे
कारगिल के शहीद शर्मिंदा हे
सारे ज़माने का थूका
हम चाट गए
लोकतंत्र के शेर
पानी पीने नए घाट गए
भांड अब इन्साफ कर रहे हैं
गनीमत हे सिर्फ शादी दिखाई
सुना हे इसमें भी टी आर पी का चक्कर हे
नगर वधुँ के लिए television नया अवसर हे
नयी दिशा , नया जमाना , नित नए पहनो ,
जो दिखेगा वो ही बिकेगा
ये तो अब ग्लोबल नारा हे
भारत अब खुल गया हे
ओबामा जी फिर से आयेगा
उधार जो वसूलना हे .......................... ,

Sunday, July 4, 2010

मेसेजों से मांग भराई

व्यभिचार के पुतले
अवैध सम्भंधो के फाटक
रिश्ते हो गए मोबाइल
मेसेजों से मांग भराई
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............

अकेलेपन का मजा
रिश्तों में तिजारत
बदन चाँदी के वर्क में लिपटा हुआ
और मन काजल की कोठरी में सिसकता हुआ
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............

टूटते मोबाइल रिश्तों के बीच
अब लैंड लाइन जरूरी हे
सामाजिक एक्सचेंजोँ
आगे आओ
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............

माँ ही जीवन का आधार हे
कलयुगी जांच मत कराइए
अगर अब नहीं संभले
तो दिन दूर नहीं , कुत्ता और आदमी
सड़क पर नज़र आयेंगे
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............

प्रगति जरुरी हे
पश्चिमी दिशा मजबूरी हे
पर कुछ तो खुद की संसकृति
का पेटेंट कराईये
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............

Tuesday, May 18, 2010

सांप पंचायत

कुत्तों की पंचायत में
कुतिया ने गुहार लगाई
अगर सारे ये सब मेरे भाई
तो में किसकी लुगाई

पंचायत में एक दहाड़
शेर बूढ़ा भी हो
जुगाली तो कर ही सकता हे

कुतिया शरमाई
फिर में जंगल ही चली जाती
कम से कम हनीमून तो मनाती

पंचायत से फिर एक दहाडा
हमारा हुक्म और तुम्हारी नाफ़रमानी
इस देस में अब नहीं बहता नदियों में पानी

जहरीले सापों खुद तो रेंग रहे हो
लोकतंत्र पर भी नजर हे
पर याद रहे
कालिया मर्दन भी हमारा शगल हे

Tuesday, April 13, 2010

एजुकेसन

गाँव में शिक्षा के नाम पर
तमाशा जारी हे
शहरों में एजुकेसन के नाम पर
गोरख धन्दा
भारी हे

दीवारों पर लीखनेसे
कुछ नहीं होगा
कुत्ता टांग उठा के धो देगा
या फिर पढ़े लिखे

लोकतंत्र में
शिक्षा अब अधिकार हे
पर उजाला
फिर चंद लोगों में बटेंगा
इस देश में फिर एक भूखा जोकर बनेगा

Thursday, April 8, 2010

बिल बनाम पर्ची

सामान खरीद कर ,
जब हमने बिल माँगा
दुकानदार ने आँख तरेरी
मुस्कुराके हमको टाँगा

जो पर्ची पर लिखा हे
वही सही हें
पक्का चाहिए तो
अलग से लगेंगे

और वारंटी गारंटी
हमारी जबान हें
बरखुरदार
ये हिंदुस्तान हें

खोटे सिक्के यहाँ
बड़ी गाडियों में चलते हें
तुम्हारे जेसे बस स्टैंड से
उतरकर हम से उलझते हे

आगे की सोचो
कागज तो सिर्फ खाता बही हे
जबान हिलाए गा
तो खाना मिल पायेगा

कागज के भरोसे
तू कोरा कागज ही रह जायेगा

Friday, March 19, 2010

आदमी

हाथी सड़क पर ,
मद मस्त जा रहा था
कुत्ता भोंका,
हाथी को नागवार गुजरा
सूंड में लपेट कर जो
पटकनी दी,
कुत्ते की दुम सीधी हो गयी
कुत्ता माँयुस हो गया ,
बोला तोड़ देते ,
अगर मेरी टांग,
कुछ दिन में ठीक हो जाती
पर आपने ने तो
आदमी बना दिया ................

Monday, March 15, 2010

हार्दिक शुभ कामनायें

नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनायें
मोहब्बत अब दिल से नहीं
दिमाग से की जाती हे
जिम्मेदारी नहीं ली जाती हे

जियो और मरने दो का फार्मूला हे

गधे एक तरफ़ा मोहब्बत करते हे
घोड़े तो अस्तबल में मोंज करते हे
जमाना बदल रहा हे
रिश्तों में भावनायों का सूरज ढल रहा हे
अब नीम के पेड काट दिए जाते हे
क्यों की सामने वाली खिड़की के बीच में आते हे

Wednesday, March 3, 2010

सामाजिक फ्राड़ीये

अजब तमाशा
गजब हे खेल
दोस्ती की रेलमपेल

गिफ्ट कर रहे प्रदान
कागा गा रहे
प्यार की तान

नेटवर्किंग का जमाना हे
फोटो देखे के फ़साना हे
भोले भले फंसे रहे हे
ये सामाजिक फ्राड़ीये हंस रहे हैं

भावानायोँ की तिजारत जारी हैं
जिस्म की भूख सबसे भारी हे

Tuesday, March 2, 2010

स्मार्ट

गर्ल फ्रेंड बन संवर कर काफी पीने
क्लब में आये
साथ में कुछ फूल भी लाये
पर बीबी घूंघट में नज़र आये

हम तो करें मोबाइल पर घूटर घू
पर बीबी को फ़ोन लैंड लाइन पर भी नहीं आये

हम रात में भी पार्टी मनाएं
पर बीबी घर से बाहर न जाये

हम संवारे देश का भविष्य
कल का इतिहास
पर घर का भूगोल
पुराना ही नज़र आये

ऐशे सामाजिक फ्राड
लगा रहे आवाज़
हम आधुनिक हो रहे हें

Friday, February 12, 2010

बनियान

आदमी बनियान में
वो भी फटी
कुत्ता नेवी ब्लू स्वेटर में
कोहरे में लोकतंत्र
रसोई में सन्नाटा
पत्रिकाएँ नीला लिबास पहने
सरवे जारी हे
मनोरजन के नाम पर राजनीति जारी हे
वेलेंटाइन के कागा
बाँट रहे प्रेम का धागा
मोह्हबत में तिजारत जारी हे
शिक्षा का स्तर बढ गया हे
एड्स की सबको जानकारी हे

Tuesday, August 11, 2009

स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू बढ रहा है
मानसून घट रहा है
इलाज के नाम पर
मुह छुपाना चल रहा है
टेबलेट खाकर डर दूर हो जाता है
नैतिक शिक्षा में अब यही पढाया जाता है
बच्चे की मौत
भी अब टी. वी. पर चिलाने का सामान है
क्या करें टी.आर पी के चक्कर में
सारे के सारे नादान है
महंगाई बेवफाई कसाब
लोकतंत्र में चरचे बेहिसाब
विदेशी बालाओं का नाच
अब सिनेमा की जरुरत है
ग्लोबल वार्मिंग जारी है
देशी कोठों पर अब विदेशी नज़र आती है
देशी विदेशों में प्रीमियम कमाती है

Tuesday, July 21, 2009

नहले पे दहला

ताऊ और ताई के पडौस मे
चकपक दम्पति रहने आये
ताई को चिढाने की गरज से
ताऊ ने कहा : अजी बुरा मत मानना
आजकल रोज ही पडौस वाली श्रीमती चकपक
मेरे सपनों मे आजाती हैं.
ताई ने पूछा - अकेले ही आती हैं ना?
ताऊ ने कहा - हां, पर तुम्हें कैसे मालूम पडा?
तई बोली - क्योंकि मि. चकपक तो रोज मेरे सपने मे आते हैं.

Monday, March 30, 2009

सुरा और साडी

सपेरे मुस्कुरा रहे हें
सांपों की बारात हे
मेंडक कर रहे डांस
देश के ऐसे हालात हें

बीन बजा रहे संत
जन मानस रहा डोल
अर्थवयस्था में होल
लोकतंत्र की पोल

चुनाव में चर्चा जारी
कही बटेगी सुरा
कही साडी

Wednesday, February 25, 2009

सांड पार्टी


सांड मुस्कुरा रहे हे
गायें खिल खिला रही हे
आधुनिकता के आड़ में
खेल जारी हे


स्लम डॉग मिलिनेअर की जय हो
पिंक चड्डी की सीमा तय हो
अब तो पिंक स्लिप का जमाना हे
मंदी का गुलाल सब को लगाना हे


गुलज़ार हो गया हिंदुस्तान
पाके इतना बड़ा सम्मान
सिले ओंठ मुस्कुराये
झोंपडी में स्लम कैट नज़र आये

Sunday, February 15, 2009

ताऊ साप्ताहिक पत्रिका -९ यहां पढिये

आप सबको नमस्कार,

ताऊ रामपुरिया के ब्लाग की फ़ीड अपडेट
नही हो रही है, सोमवार की पोस्ट वाली.

आज "ताऊ साप्ताहिक पत्रिका -९" जिसमे कि शनीचरी पहेली -९ के रिजल्ट
भी दिये हुये हैं वो पोस्ट आप यहा चटका लगा कर पढ सकते हैं.

धन्यवाद.

Wednesday, February 11, 2009

कुत्तों का टीकाकरण

कुत्तों का टीकाकरण शत प्रतिशत हुआ
कालोनी ने राहत की साँस ली
दुर्भाग्य ने पीछा नही छोडा
एक दल बदलू मेरे पीछे दोडा
में जब तक संभल पाता
उसने मुझे सूंघ लिया
मुस्कुराया
और सवाल दागा
अबे वैलेंटाइन के कागा
हमारी जमात की नक़ल
उसमे भी तुम्हारी सामाजिक पहल .......
ख़ुद को तो टीका लगवायो
नही मानोगे
तो पेड़ पर तुम
सड़क पर हम नज़र आयेंगे

Monday, February 2, 2009

जुगाली

परेड ग्राउंड की पार्किंग में
जेसे ही मेने गाड़ी पार्क की

वो आया
मुस्कुराया
दुम हिलाई
टांग उपर की
चला गया ................

ग्राउंड पर चर्चा व्याप्त थी
सत्यम बेल आउट पैकेज ........

शायद साहस में भी मंदी हे

अब साठ के बाद कहाँ तेजी
अब तो मंद मंद जुगाली ही करेगा
उधारी में हो अगर जंगल
तो राजा सिर्फ़ टांग ही उपर कर सकता हे

Saturday, January 31, 2009

मगरमच्छ के आंसू

चमचो को चरण स्पर्श
नेताओँ को वंदन
जांच की चिता पर
लोकतंत्र का चंदन

मगरमच्छ के आंसू
एक्टिंग भी धांसू
नही मिला सुराग जमी पर
पानी का जहाज ले आए

दूम हिलाते बफादारोँ
कर्जे में डूबे राष्ट्र के कुबेरों
इतिहास तुम्हे माफ़ नही करेगा
तुम बच भी गए , आने वाली नस्ल को साफ़ करेगा