नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनायें
मोहब्बत अब दिल से नहीं
दिमाग से की जाती हे
जिम्मेदारी नहीं ली जाती हे
जियो और मरने दो का फार्मूला हे
गधे एक तरफ़ा मोहब्बत करते हे
घोड़े तो अस्तबल में मोंज करते हे
जमाना बदल रहा हे
रिश्तों में भावनायों का सूरज ढल रहा हे
अब नीम के पेड काट दिए जाते हे
क्यों की सामने वाली खिड़की के बीच में आते हे
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
-
कामरेड नाखुश हैं हमसे, मंदिर-मस्जिद वाले भी
मज़दूरों के नेता नाखुश, नाखुश उनके लाले भी॥
नाशादों को शाद करूँ, यह सोच रहा हूँ कुछ दिन से
जले दिलों के इस जग मे...
1 week ago

2 comments:
बहुत बढ़िया वाकई में....और नव वर्ष की शुभकामनाएँ.........."
प्रणव सक्सैना
amitraghat.blogspot.com
गुडी पडवा की बहुत बधाई.
रामराम.
Post a Comment