नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनायें
मोहब्बत अब दिल से नहीं
दिमाग से की जाती हे
जिम्मेदारी नहीं ली जाती हे
जियो और मरने दो का फार्मूला हे
गधे एक तरफ़ा मोहब्बत करते हे
घोड़े तो अस्तबल में मोंज करते हे
जमाना बदल रहा हे
रिश्तों में भावनायों का सूरज ढल रहा हे
अब नीम के पेड काट दिए जाते हे
क्यों की सामने वाली खिड़की के बीच में आते हे
🌙ग़ज़ल - तुम्हारे हैं
-
Happy New Year 5128 📅 "रौद्र" नामक संवत्सर पर सबको शुभकामनाएँ 🙏 *श्री
शालिवाहन शक 1948, युगाब्द 5128, संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुढीपड़वा,
नवरात्र...
5 days ago

2 comments:
बहुत बढ़िया वाकई में....और नव वर्ष की शुभकामनाएँ.........."
प्रणव सक्सैना
amitraghat.blogspot.com
गुडी पडवा की बहुत बधाई.
रामराम.
Post a Comment