स्वाइन फ्लू बढ रहा है
मानसून घट रहा है
इलाज के नाम पर
मुह छुपाना चल रहा है
टेबलेट खाकर डर दूर हो जाता है
नैतिक शिक्षा में अब यही पढाया जाता है
बच्चे की मौत
भी अब टी. वी. पर चिलाने का सामान है
क्या करें टी.आर पी के चक्कर में
सारे के सारे नादान है
महंगाई बेवफाई कसाब
लोकतंत्र में चरचे बेहिसाब
विदेशी बालाओं का नाच
अब सिनेमा की जरुरत है
ग्लोबल वार्मिंग जारी है
देशी कोठों पर अब विदेशी नज़र आती है
देशी विदेशों में प्रीमियम कमाती है
ग़ज़ल: सँवारे क्यों
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काम नहीं जो आने वाला, उसको कोई पुकारे क्यों।
बाज़ारों की इस बस्ती में, दिल को कोई निखारे क्यों॥
इस्तेमाल का दौर नया है, भोगें-फेंकें, चलो-टलो,
जो पीछे छोड़...
6 days ago
