सामजिक पीकदान
के कारण,
कई अभिलाषाएं , कई प्रतिभाएं ,
कुर्बान
पुरूष खोलता हे
कपडों की डोरियाँ मुस्कुराकर ,
पर जकड देता हे मन को
परम्पराओ का आइना दिखा कर
मंदी में
सामजिक व्यवस्था हे
जननी का शरीर
सबसे सस्ता हे
मौन का आधार और संवाद का आकार
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मौन के विज्ञान के
विद्वान भी होंगे कहीं,
हम भला कैसे कहें कि
मौन का आधार क्या है।
प्रश्न जब कोई उठे और
उत्तरों की प्यास हो,
दो तटों को जोड़ दे
उस सेतु की ह...
1 week ago
