विज्ञापन जगत में होर्डिंग
जगह के हिसाब से बिकता हे
बापू की आढ़ में
इनका चेहरा दिखता
ये लोकतंत्र के रहनुमा हे
इन्हे पहचानो
यह थाने में ,मयखाने में
सर्वत्र व्याप्त हे
बापू के नाम की रोज खाते हे
लूट में इनकी हिसे दारी हे
विज्ञापन इनका पेशा हे
यह अब हर जगह नज़र आयेंगे
तुम सिर्फ़ ये याद रखना
बदलना हो वयवस्था
तो इन्हे साथ मत रखना
बस बापू की तस्वीर काफी हे
सच्चाई अभी बाकी हे ...........
इशिलिये आज भी हम बापू को याद करते हे
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
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कामरेड नाखुश हैं हमसे, मंदिर-मस्जिद वाले भी
मज़दूरों के नेता नाखुश, नाखुश उनके लाले भी॥
नाशादों को शाद करूँ, यह सोच रहा हूँ कुछ दिन से
जले दिलों के इस जग मे...
1 week ago
