कुत्तों की पंचायत में
कुतिया ने गुहार लगाई
अगर सारे ये सब मेरे भाई
तो में किसकी लुगाई
पंचायत में एक दहाड़
शेर बूढ़ा भी हो
जुगाली तो कर ही सकता हे
कुतिया शरमाई
फिर में जंगल ही चली जाती
कम से कम हनीमून तो मनाती
पंचायत से फिर एक दहाडा
हमारा हुक्म और तुम्हारी नाफ़रमानी
इस देस में अब नहीं बहता नदियों में पानी
जहरीले सापों खुद तो रेंग रहे हो
लोकतंत्र पर भी नजर हे
पर याद रहे
कालिया मर्दन भी हमारा शगल हे
सच: कुछ हाइकु खरे-खरे
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*1. खरे बोल से तौबा*
कड़वा सच,
सुनाते ही रहते,
सह न पाते।
*2. पर उपदेश*
ज़हर सच,
औरों को ही पिलाते,
खुद न पीते।
*3. अहंकार*
कहते खरे,
कोई और जो कहे,
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4 days ago
