चमचो को चरण स्पर्श
नेताओँ को वंदन
जांच की चिता पर
लोकतंत्र का चंदन
मगरमच्छ के आंसू
एक्टिंग भी धांसू
नही मिला सुराग जमी पर
पानी का जहाज ले आए
दूम हिलाते बफादारोँ
कर्जे में डूबे राष्ट्र के कुबेरों
इतिहास तुम्हे माफ़ नही करेगा
तुम बच भी गए , आने वाली नस्ल को साफ़ करेगा
हिंदी ग़ज़ल: अनुराग शर्मा
-
द्वार प्रेम के खुले हुए हों, बंद झरोखे संशय के हों,
मिटते साये छल के दिल में, बीते कल के भय के हों।
साफ़ नज़र आती है मंज़िल, साफ़ नज़र है राहों की,
मिटने ह...
1 week ago
