आर्थिक अवैध संबंधों की
दलाली तुमने चबा ली
हरम का झूठा प्याला
निवेशकों को सरका दिया
संक्रमण से असाध्य रोग फेलता हे
ऐसा अमरीका ने बताया हे
बन्दर कोई भी हो ..............
लोकतंत्र के लकड़हारों
फिर जांच करोगे
पुरानी फाइल तो अब तक पेंडिंग हे
हे तंत्र में लिपटे परजीवियों
जो हम खाएं , तुम पीजाओ
हमारा इन्वेस्टमेंट ,
तुम्हारे लिए डिविडेंड
facevalue पर अधिकार तुम्हारा
चरमराये तो बोडी हमारी
तुम करो ऑपरेशन
मरीज की शय्या पर हम
और तो और वर्ल्ड बैंक को भी
अभी याद आई की ,
लुगाई में दोष हे ,
अब ,नयी घोडी नया दाम
तवायफ के कोठे पर
जमीर अभी जिन्दा हे
कार्पोरेट में इसे बेचना
धंधा हे
हिंदी ग़ज़ल: अनुराग शर्मा
-
द्वार प्रेम के खुले हुए हों, बंद झरोखे संशय के हों,
मिटते साये छल के दिल में, बीते कल के भय के हों।
साफ़ नज़र आती है मंज़िल, साफ़ नज़र है राहों की,
मिटने ह...
3 months ago
