बेटे ने व्यस्त बाप से पुछा
आपकी गाड़ी चाहिए
ड्राइविंग लाईसेन्स के लिए
ट्रायल देना हे
बाप ने झिड़कते हुए कहा
ले पॉँच सो , दे आना
लाईसेन्स घर आ जाएगा
तू नई bike ले आ
आज कंधे पे
वो लाईसेन्स धारी हे
और जवान फोटो पर माला
वो नोट आज भी चल रहा हे
🌙ग़ज़ल - तुम्हारे हैं
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Happy New Year 5128 📅 "रौद्र" नामक संवत्सर पर सबको शुभकामनाएँ 🙏 *श्री
शालिवाहन शक 1948, युगाब्द 5128, संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुढीपड़वा,
नवरात्र...
1 day ago

11 comments:
आज कंधे पे
वो लाईसेन्स धारी हे
और जवान फोटो पर माला
वो नोट आज भी चल रहा हे
बहुत शानदार व्यंग किया है मकरंद सर !
बहुत बढिया कविता ! लिखते रहिये !
बहुत खूब।
इस छोटी सी कविता ने भारतीय परिवार के यथार्थ को बहुत ही सलीके से और धारदार तरीके से व्यक्त किया है। बधाई।
सही पकड़ा है!
चंद शब्दों में समाज पर अच्छा व्यंग्य किया
सुंदर व्यंग रचना के लिए बधाई स्वीकारें मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन के लिए बहुत बहुत धनयबाद नई रचना हैण्ड वाश डे पढने पुन: आमंत्रित हैं
बहुत ही सटीक व्यंग किया आज के युग पर, आंखे खोलने कै कबिल है आप की यह कविता.
धन्यवाद
वाह ! बहुत बढ़िया !
बहुत ही अच्छी व्यंगात्मक कविता के लिए बहुत बहुत बधाई
आज कंधे पे
वो लाईसेन्स धारी हे
और जवान फोटो पर माला
वो नोट आज भी चल रहा हे
' oh no, what a tragedy..'
regards
गजब का लिखा है। यह कविता तो सड़कों पर ईमानदारी से ड्राइविंग लाइसेंस लेने व सावधानी से गाड़ी चलाने के प्रचार के लिए लगी होनी चाहिए ।
घुघूती बासूती
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