गर्ल फ्रेंड बन संवर कर काफी पीने
क्लब में आये
साथ में कुछ फूल भी लाये
पर बीबी घूंघट में नज़र आये
हम तो करें मोबाइल पर घूटर घू
पर बीबी को फ़ोन लैंड लाइन पर भी नहीं आये
हम रात में भी पार्टी मनाएं
पर बीबी घर से बाहर न जाये
हम संवारे देश का भविष्य
कल का इतिहास
पर घर का भूगोल
पुराना ही नज़र आये
ऐशे सामाजिक फ्राड
लगा रहे आवाज़
हम आधुनिक हो रहे हें
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
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कामरेड नाखुश हैं हमसे, मंदिर-मस्जिद वाले भी
मज़दूरों के नेता नाखुश, नाखुश उनके लाले भी॥
नाशादों को शाद करूँ, यह सोच रहा हूँ कुछ दिन से
जले दिलों के इस जग मे...
1 week ago
