आदमी बनियान में
वो भी फटी
कुत्ता नेवी ब्लू स्वेटर में
कोहरे में लोकतंत्र
रसोई में सन्नाटा
पत्रिकाएँ नीला लिबास पहने
सरवे जारी हे
मनोरजन के नाम पर राजनीति जारी हे
वेलेंटाइन के कागा
बाँट रहे प्रेम का धागा
मोह्हबत में तिजारत जारी हे
शिक्षा का स्तर बढ गया हे
एड्स की सबको जानकारी हे
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
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कामरेड नाखुश हैं हमसे, मंदिर-मस्जिद वाले भी
मज़दूरों के नेता नाखुश, नाखुश उनके लाले भी॥
नाशादों को शाद करूँ, यह सोच रहा हूँ कुछ दिन से
जले दिलों के इस जग मे...
1 week ago

3 comments:
बहुत बढ़िया!!
अच्छी कविता है.
बालक के ब्लॉग में मुन्ने का कमेन्ट भी बढ़िया है.
मेरा मतलब है मुन्ने का चित्र भी अच्छा है.
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