व्यभिचार के पुतले
अवैध सम्भंधो के फाटक
रिश्ते हो गए मोबाइल
मेसेजों से मांग भराई
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
अकेलेपन का मजा
रिश्तों में तिजारत
बदन चाँदी के वर्क में लिपटा हुआ
और मन काजल की कोठरी में सिसकता हुआ
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
टूटते मोबाइल रिश्तों के बीच
अब लैंड लाइन जरूरी हे
सामाजिक एक्सचेंजोँ
आगे आओ
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
माँ ही जीवन का आधार हे
कलयुगी जांच मत कराइए
अगर अब नहीं संभले
तो दिन दूर नहीं , कुत्ता और आदमी
सड़क पर नज़र आयेंगे
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
प्रगति जरुरी हे
पश्चिमी दिशा मजबूरी हे
पर कुछ तो खुद की संसकृति
का पेटेंट कराईये
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
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कामरेड नाखुश हैं हमसे, मंदिर-मस्जिद वाले भी
मज़दूरों के नेता नाखुश, नाखुश उनके लाले भी॥
नाशादों को शाद करूँ, यह सोच रहा हूँ कुछ दिन से
जले दिलों के इस जग मे...
1 week ago
