स्वाइन फ्लू बढ रहा है
मानसून घट रहा है
इलाज के नाम पर
मुह छुपाना चल रहा है
टेबलेट खाकर डर दूर हो जाता है
नैतिक शिक्षा में अब यही पढाया जाता है
बच्चे की मौत
भी अब टी. वी. पर चिलाने का सामान है
क्या करें टी.आर पी के चक्कर में
सारे के सारे नादान है
महंगाई बेवफाई कसाब
लोकतंत्र में चरचे बेहिसाब
विदेशी बालाओं का नाच
अब सिनेमा की जरुरत है
ग्लोबल वार्मिंग जारी है
देशी कोठों पर अब विदेशी नज़र आती है
देशी विदेशों में प्रीमियम कमाती है
हिंदी ग़ज़ल: अनुराग शर्मा
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द्वार प्रेम के खुले हुए हों, बंद झरोखे संशय के हों,
मिटते साये छल के दिल में, बीते कल के भय के हों।
साफ़ नज़र आती है मंज़िल, साफ़ नज़र है राहों की,
मिटने ह...
3 days ago






