मानसिक अपँग
पर चाहिए छरहरी
कपड़े तंग
आधुनिक चिंतन
हवाई मंथन
माँ का दुलार
बहन का प्यार
पत्नी का साथ
सब बकवास ........
तवायफ की अदा
हवा में सदा
मद भरी आँखे
मस्त नज़ारे
लम्बाई और वजन में
सामंजस्य होना चाहिए
तुम्हे छोड़
सब को गुलाब जामुन खाना चाहिए
ग़ज़ल
-
छोड़कर हमको प्रिये, ताउम्र पछताओगी तुम
दिल हमारा तोड़कर, रहने कहाँ जाओगी तुम।
फूल से चेहरे पे आँसू का लगा जैसे हुज़ूम,
आईने में देखकर, खुद से ही घबराओगी तुम।...
2 weeks ago







13 comments:
बहुत खूब।
विचार एकदम सॉलिड है।
जय हो मकरंद सर की.
रामराम.
वाह ! वाह ! वाह !
बहुत सुंदर ! लाजवाब !
काका हाथरसी याद आते हैं - बहू खूब गोरी होय, पढ़ी चाहे थोरी होय, रूप की कटोरी होय, जैसे फिल्म तारिका!
wah !! kya mast likha hai, bilkul sahi nabz pakdi :)
बेहतरीन हर बार की तरह हाइकू शैल्ले में सुंदर अभिव्यक्ति बधाई
मानसिक अपँग
पर चाहिए छरहरी
कपड़े तंग
" ha ha ha ha haha ha ha , great sense of humor, "
regards
क्या कहूं, उम्दा विचार, जब भी नयी पोस्ट लिखें मेरे ब्लाग पर लिन्क देने की कॄपा करें.
:):):)
जादू कलम का,
विचार गजब का,
सच्चा आइना,
चेहरा समाज का,
कहते हैं आधुनिकता...........
मानसिक अपँग
पर चाहिए छरहरी
कपड़े तंग
गज़ब!
kuchh ktaaksh, kuchh vyang, aur sath hi kaheeN chhipi.chhipi.si
sachchaaee bhi...
achhi rachna ke liye badhaaee !!
---MUFLIS---
bhut sundar rchana.
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