सभी प्रकार के कांडों में लिप्त हे सांड
अब लायो कोई नया ब्रांड,
नया साल जो आ गया
सीडी , दलाली , संसद ,रिश्वत ,
आतंक ताज ओबेराय मुंबई
ये तो पिछला साल खा गया,
ब्रांड इंडिया चमक रहा चारों और
शेयर बाज़ार बना गया अर्थशास्त्रियों को ढोर,
इस बार तो ब्यूटी को भी नही मिला भाग्य का साथ
हिरोईनों ने कर लिया बिकनी को आत्मसात,
रुपहले परदे पर कपडों की क्या बिसात
नए साल में और प्रयोग होंगे ,
इस बार तुम जो भी ब्रांड लायो
इतनी कृपा करो माँ को मत बेच खाओ
ग़ज़ल
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छोड़कर हमको प्रिये, ताउम्र पछताओगी तुम
दिल हमारा तोड़कर, रहने कहाँ जाओगी तुम।
फूल से चेहरे पे आँसू का लगा जैसे हुज़ूम,
आईने में देखकर, खुद से ही घबराओगी तुम।...
2 weeks ago







11 comments:
bahut badhiya shabdon me aaj ke kalyug ko vyakt kiya hai.. nav varsh ki shubhkaamnaye..
samay chitra achha khincha hai
नए साल में नए ब्रांड लाओ पर माँ को मत बेचो .....बढ़िया है जमाये रहो भैय्या .
बहुत बढिया मकरंद सर.
रामराम.
इस बार तुम जो भी ब्रांड लायो
इतनी कृपा करो माँ को मत बेच खाओ
-सुंदर
नये वर्ष की औपचारिक शुभकामनाओं से हट कर की गई इस कामना के लिये बधाई और आभार।
बहुत ज़बरदस्त रचना !!!!!
नये वर्ष की शुभकामना..
नये साल की मुबारकबाद कुबूल फरमाऍं।
मकरंद भाई, आप तो गज़ब कविता लिख रहे हो, बधाई!
बढीया रचना ।
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