सपेरे मुस्कुरा रहे हें
सांपों की बारात हे
मेंडक कर रहे डांस
देश के ऐसे हालात हें
बीन बजा रहे संत
जन मानस रहा डोल
अर्थवयस्था में होल
लोकतंत्र की पोल
चुनाव में चर्चा जारी
कही बटेगी सुरा
कही साडी
ग़ज़ल: सँवारे क्यों
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काम नहीं जो आने वाला, उसको कोई पुकारे क्यों।
बाज़ारों की इस बस्ती में, दिल को कोई निखारे क्यों॥
इस्तेमाल का दौर नया है, भोगें-फेंकें, चलो-टलो,
पीछे छोड़ा ज...
1 week ago






