Tuesday, January 6, 2009

हवाई विचार

मानसिक अपँग
पर चाहिए छरहरी
कपड़े तंग

आधुनिक चिंतन
हवाई मंथन

माँ का दुलार
बहन का प्यार
पत्नी का साथ
सब बकवास ........

तवायफ की अदा
हवा में सदा
मद भरी आँखे
मस्त नज़ारे

लम्बाई और वजन में
सामंजस्य होना चाहिए
तुम्हे छोड़
सब को गुलाब जामुन खाना चाहिए

13 comments:

Zakir Ali Rajnish (TSALIIM) said...

बहुत खूब।

विचार एकदम सॉलिड है।

ताऊ रामपुरिया said...

जय हो मकरंद सर की.

रामराम.

रंजना said...

वाह ! वाह ! वाह !
बहुत सुंदर ! लाजवाब !

Gyan Dutt Pandey said...

काका हाथरसी याद आते हैं - बहू खूब गोरी होय, पढ़ी चाहे थोरी होय, रूप की कटोरी होय, जैसे फिल्म तारिका!

vimi said...

wah !! kya mast likha hai, bilkul sahi nabz pakdi :)

प्रदीप मानोरिया said...

बेहतरीन हर बार की तरह हाइकू शैल्ले में सुंदर अभिव्यक्ति बधाई

seema gupta said...

मानसिक अपँग
पर चाहिए छरहरी
कपड़े तंग

" ha ha ha ha haha ha ha , great sense of humor, "

regards

COMMON MAN said...

क्या कहूं, उम्दा विचार, जब भी नयी पोस्ट लिखें मेरे ब्लाग पर लिन्क देने की कॄपा करें.

Dr. Amar Jyoti said...

:):):)

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

जादू कलम का,
विचार गजब का,
सच्चा आइना,
चेहरा समाज का,
कहते हैं आधुनिकता...........

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

मानसिक अपँग
पर चाहिए छरहरी
कपड़े तंग

गज़ब!

MUFLIS said...

kuchh ktaaksh, kuchh vyang, aur sath hi kaheeN chhipi.chhipi.si
sachchaaee bhi...
achhi rachna ke liye badhaaee !!
---MUFLIS---

Shobhana said...

bhut sundar rchana.