घोटाला वीरों
शत शत नमन अभिन्दन
घिसने से फेल रही तुम्हारी कीर्ति
हे आईटी के चंदन
अर्थशास्त्र के कला बाजों
स्वतंत्र चाटुकारों
शेर घायल होते ही काटने लगे
तंत्र के पहलवानों
नूरा कुश्ती फिर शुरू
आर्थिक सलाह्करोँ
बताओ
अब मोटर बोट कहाँ से आयी ?
तुमने जाँच बीठा दी
लोली पॉप की खाली डंडी
हमे पकड़ा दी
भारत की आर्थिक प्रगति में अभी गटर के खुले चेम्बर और भी हें
ग़ज़ल: सँवारे क्यों
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काम नहीं जो आने वाला, उसको कोई पुकारे क्यों।
बाज़ारों की इस बस्ती में, दिल को कोई निखारे क्यों॥
इस्तेमाल का दौर नया है, भोगें-फेंकें, चलो-टलो,
पीछे छोड़ा ज...
1 week ago






