Wednesday, October 1, 2008

शुभकामनाये

सभी ब्लॉग धारियों को
शत शत मेरा प्रणाम
नित नित नव सृजन का
करते नव भारत का निर्माण

सब के अपने रंग
सब के अपने ढंग
सब की अपनी काया
सब की अपनी माया

फेला हर तरफ़ विषाद
अपराध आतंक से भयभीत
चारों तरफ समाज

नवरात्र के पावन बेला में
करे हम नया सूधार
टिप्पणियों का मोह छोड़
लिखे रोज नया विचार

शुभकामनाये
नवरात्र शुभ हो

रावन दहन जरुर बचों को दिखाएँ

9 comments:

seema gupta said...

मार्केट का मूड
बीबी या प्रेमिका जैसा हे
जैसा सोचो होता नही
"these are very true wonderful and appreciable thought of yours, really i liked it'

regards

मोहन वशिष्‍ठ said...

सभी ब्लॉग धारियों को
शत शत मेरा प्रणाम
नित नित नव सृजन का
करते नव भारत का निर्माण
वाह जी बहुत ही सुंदर शब्‍दों की माला बनाई हे आपने अति सुंदर

ताऊ रामपुरिया said...

जैसा सोचो होता नही


बहुत बढिया मकरंद सर !

भूतनाथ said...

सब के अपने रंग
सब के अपने ढंग
सब की अपनी काया
सब की अपनी माया

सर जी बहुत गजब ! मजा आगया !

दीपक "तिवारी साहब" said...

बेहतरीन ! तिवारी साहब का सलाम !

Bhairav said...

दिनों दिन निखार आता जा रहा है ! सलाम !

योगेन्द्र मौदगिल said...

भई वाह प्यारे
मज़ा आ गया
सुंदर कविता

राज भाटिय़ा said...

बजुत ही सुनदर लिखा हे आप ने इस के लिये आप का धन्यवाद

sangeeta said...

vyangaatmak lekhan men mahaarath haasil hai.
badhai