Wednesday, October 15, 2008

ड्राइविंग लाईसेन्स

बेटे ने व्यस्त बाप से पुछा
आपकी गाड़ी चाहिए
ड्राइविंग लाईसेन्स के लिए
ट्रायल देना हे

बाप ने झिड़कते हुए कहा
ले पॉँच सो , दे आना
लाईसेन्स घर आ जाएगा
तू नई bike ले आ

आज कंधे पे
वो लाईसेन्स धारी हे
और जवान फोटो पर माला
वो नोट आज भी चल रहा हे

11 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

आज कंधे पे
वो लाईसेन्स धारी हे
और जवान फोटो पर माला
वो नोट आज भी चल रहा हे
बहुत शानदार व्यंग किया है मकरंद सर !

दीपक "तिवारी साहब" said...

बहुत बढिया कविता ! लिखते रहिये !

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

बहुत खूब।
इस छोटी सी कविता ने भारतीय परिवार के यथार्थ को बहुत ही सलीके से और धारदार तरीके से व्यक्त किया है। बधाई।

डॉ .अनुराग said...

सही पकड़ा है!

रश्मि प्रभा said...

चंद शब्दों में समाज पर अच्छा व्यंग्य किया

प्रदीप मानोरिया said...

सुंदर व्यंग रचना के लिए बधाई स्वीकारें मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन के लिए बहुत बहुत धनयबाद नई रचना हैण्ड वाश डे पढने पुन: आमंत्रित हैं

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सटीक व्यंग किया आज के युग पर, आंखे खोलने कै कबिल है आप की यह कविता.
धन्यवाद

सतीश सक्सेना said...

वाह ! बहुत बढ़िया !

Radhika Budhkar said...

बहुत ही अच्छी व्यंगात्मक कविता के लिए बहुत बहुत बधाई

seema gupta said...

आज कंधे पे
वो लाईसेन्स धारी हे
और जवान फोटो पर माला
वो नोट आज भी चल रहा हे
' oh no, what a tragedy..'

regards

ghughuti said...

गजब का लिखा है। यह कविता तो सड़कों पर ईमानदारी से ड्राइविंग लाइसेंस लेने व सावधानी से गाड़ी चलाने के प्रचार के लिए लगी होनी चाहिए ।
घुघूती बासूती