Monday, October 6, 2008

आर्थिक मंदी और अध्यात्म

आर्थिक मंदी के चलते
विश्व हुआ बेहाल
सभी उधोगों के शेयर
थक कर हुए निडाल

अध्यात्म की कम्पनियो का धंधा
हुआ चोगुना
विदेशी मुद्रा भी कमाई
दलालों का इनवेस्टमेंट दुगना

कथावाचक दे रहे अब
ज्योतिष की सीख
अन्धविश्वास के नाम पर
खीचे लाखों की भीड़

सभी धंदे त्रस्त हे
पर यहाँ सभी प्रोडक्ट मस्त हे
उद्योगों को आ रहा पसीना
इनके एयरकंडीशनर का बजट दुगुना

फिल्मी गीतों की तर्ज पर
होती भगवान से प्रीत
शाम डालते मंच पर
होती सोशललाइट ओं की भीड़

लोकतंत्र की जननी
शत शत तुझे प्रणाम
श्रधा के अद्धे पर
सभी भक्त कुर्बान

11 comments:

seema gupta said...

लोकतंत्र की जननी
शत शत तुझे प्रणाम
श्रधा के अद्धे पर
सभी भक्त कुर्बान
' wah great, you write on current affars very well and in a very effective manner, liked reading it ya'

regards

भूतनाथ said...

लोकतंत्र की जननी
शत शत तुझे प्रणाम
श्रधा के अद्धे पर
सभी भक्त कुर्बान
बहुत गजब लिखा ! धन्यवाद !

ताऊ रामपुरिया said...

कथावाचक दे रहे अब
ज्योतिष की सीख
अन्धविश्वास के नाम पर
खीचे लाखों की भीड़
बहुत बढिया मकरंद सर !

रश्मि प्रभा said...

फिल्मी गीतों की तर्ज पर
होती भगवान से प्रीत
शाम डालते मंच पर
होती सोशललाइट ओं की भीड़
....... बहुत सही चित्रण..........
बहुत सहज,सुन्दर लेखन है

zeashan zaidi said...

real story very well picturize

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया!!

गौतम राजरिशी said...

kyaa baat hai marakand jee.bhai kyaa prastuti hai.majaa aa gayaa.
aur hamari taarif kaa shukriyaa

G M Rajesh said...

aapke arth shstriy
kavitt par
hue hum kurbaan

udhyogo ki duhaai
kare sab kuchh
balidaan

padhkar thodi
khushi hai
fir thode hairaan

sakuchaate likh
rahe tumhe
makrandji pranaam

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

आर्थिक मंदी और आध्‍यात्‍मक का बडा सुन्‍दर काम्बिनेशन दिखाया है। इसी बहाने आपने मजेदार कविता सुनाया है।

ओमप्रकाश तिवारी said...

मजेदार कविता

प्रदीप मानोरिया said...

आपके आगमन के लिए धन्यबाद मेरी नई रचना शेयर बाज़ार पढने आप सादर आमंत्रित हैं
कृपया पधार कर आनंद उठाए जाते जाते अपनी प्रतिक्रया अवश्य छोड़ जाए