अजब तमाशा
गजब हे खेल
दोस्ती की रेलमपेल
गिफ्ट कर रहे प्रदान
कागा गा रहे
प्यार की तान
नेटवर्किंग का जमाना हे
फोटो देखे के फ़साना हे
भोले भले फंसे रहे हे
ये सामाजिक फ्राड़ीये हंस रहे हैं
भावानायोँ की तिजारत जारी हैं
जिस्म की भूख सबसे भारी हे
हिंदी ग़ज़ल: अनुराग शर्मा
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द्वार प्रेम के खुले हुए हों, बंद झरोखे संशय के हों,
मिटते साये छल के दिल में, बीते कल के भय के हों।
साफ़ नज़र आती है मंज़िल, साफ़ नज़र है राहों की,
मिटने ह...
3 days ago







3 comments:
नेटवर्किंग का जमाना हे
फोटो देखे के फ़साना हे
भोले भले फंसे रहे हे
ये सामाजिक फ्राड़ीये हंस रहे हैं
वाह सरजी, लाजवाब जी.
रामराम.
कागा गा रहे
प्यार की तान
:)
मकरंद जी ये आपकी ही तस्वीर है और उम्र भी यही ......??
कविता उम्र के हिसाब से बहुत बड़ी है ......!!
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