Wednesday, March 3, 2010

सामाजिक फ्राड़ीये

अजब तमाशा
गजब हे खेल
दोस्ती की रेलमपेल

गिफ्ट कर रहे प्रदान
कागा गा रहे
प्यार की तान

नेटवर्किंग का जमाना हे
फोटो देखे के फ़साना हे
भोले भले फंसे रहे हे
ये सामाजिक फ्राड़ीये हंस रहे हैं

भावानायोँ की तिजारत जारी हैं
जिस्म की भूख सबसे भारी हे

3 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

नेटवर्किंग का जमाना हे
फोटो देखे के फ़साना हे
भोले भले फंसे रहे हे
ये सामाजिक फ्राड़ीये हंस रहे हैं

वाह सरजी, लाजवाब जी.

रामराम.

ali said...

कागा गा रहे
प्यार की तान
:)

हरकीरत ' हीर' said...

मकरंद जी ये आपकी ही तस्वीर है और उम्र भी यही ......??

कविता उम्र के हिसाब से बहुत बड़ी है ......!!