अजब तमाशा
गजब हे खेल
दोस्ती की रेलमपेल
गिफ्ट कर रहे प्रदान
कागा गा रहे
प्यार की तान
नेटवर्किंग का जमाना हे
फोटो देखे के फ़साना हे
भोले भले फंसे रहे हे
ये सामाजिक फ्राड़ीये हंस रहे हैं
भावानायोँ की तिजारत जारी हैं
जिस्म की भूख सबसे भारी हे
ग़ज़ल: सँवारे क्यों
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काम नहीं जो आने वाला, उसको कोई पुकारे क्यों।
बाज़ारों की इस बस्ती में, दिल को कोई निखारे क्यों॥
इस्तेमाल का दौर नया है, भोगें-फेंकें, चलो-टलो,
पीछे छोड़ा ज...
1 week ago






