गर्ल फ्रेंड बन संवर कर काफी पीने
क्लब में आये
साथ में कुछ फूल भी लाये
पर बीबी घूंघट में नज़र आये
हम तो करें मोबाइल पर घूटर घू
पर बीबी को फ़ोन लैंड लाइन पर भी नहीं आये
हम रात में भी पार्टी मनाएं
पर बीबी घर से बाहर न जाये
हम संवारे देश का भविष्य
कल का इतिहास
पर घर का भूगोल
पुराना ही नज़र आये
ऐशे सामाजिक फ्राड
लगा रहे आवाज़
हम आधुनिक हो रहे हें
हिंदी ग़ज़ल: अनुराग शर्मा
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द्वार प्रेम के खुले हुए हों, बंद झरोखे संशय के हों,
मिटते साये छल के दिल में, बीते कल के भय के हों।
साफ़ नज़र आती है मंज़िल, साफ़ नज़र है राहों की,
मिटने ह...
3 days ago







4 comments:
भारत स्प्लिट पर्सनालिटी का देश है!
वाह ये जोरदार सतका बैठाया प्यारे.
रामराम.
होली की रामराम.
ऐशे सामाजिक फ्राड
लगा रहे आवाज़
हम आधुनिक हो रहे हें .....bahut badhiya.
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