Friday, November 14, 2008

चाँद

शाम ढलते तेरी जुल्फों से चाँद को झाँका, इतने में कम्भखत मोबाइल कांपा
आदत से मजबूर बटन दबाया आवाज आई ,चाँदनी की रिंग टोन मुफ्त उपलब्ध हे
sms कीजिये moon1234..
इधर मोबाइल बंद हुआ उधर किसिने दरवाजा खटखटाया
सामने नजाए आई चाँदनी ,
सर, आप चाँद से परेशान हें,हमारी कंपनी का तेल लगाइए
शर्तिया तीन महीने में काले बालों से लेस हो जाइये .
जैसे ही किया दरवाजा बंद,
अपनी उम्र का ख्याल करो इतनी देर क्या गूंटर गु कर रहे थे

चाँद बादलों में जा चुका था
और मुस्कुरा रही थी चाँदनी

24 comments:

मोहन वशिष्‍ठ said...

ओए होए होए ये क्‍या हो गया जैसे ही चांद को झांका कंबख्‍त मोबाइल कांपा
मालिक ऐसे में मोबाइल को बंद कर दो और दरबाजा खोल देना चाहिए था अच्‍छी रचना के लिए बधाई

ताऊ रामपुरिया said...

चाँद बादलों में जा चुका था
और मुस्कुरा रही थी चाँदनी

मकरंद सर , ज़रा संभलकर ! लगता है आज घर पर फोन करना ही पडेगा ! :)
बहुत बढिया ! शुभकामनाएं !

दीपक "तिवारी साहब" said...

छा गए आज तो ! क्या जलवे बिखेरे हैं ?

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर ! अच्‍छा लिखा है । बहुत खुशी हुई पढकर। विष्‍वास है ऐसी ही रचनाएं आगे भी पढने को मिलती रहेगी।

Dr. G. S. NARANG said...

bahut shandaar....

डॉ .अनुराग said...

गंभीर दृष्टि है !

Gyan Dutt Pandey said...

वास्तव में - प्रोफाइल की फोटो से बहुत उलट गम्भीर रचना!
धन्यवाद।

mehek said...

waah chandani tel bech rahi hai,umar se ghate chand ko phir ugane ke liye:),bahut hi achhi rachana rahi,ek muskan chod gayi mukhmandal par

राज भाटिय़ा said...

भाई अगली बार मोबईल को बंद कर के, बाहर के दरावाजे पर बाहर से ताला लगा कर, पिछल्र दरवाजे से अन्दर आ कर लाईट बन्द कर के,ओर चांदनी का तेल पहले से खरीद कर, आराम से अपने चांद को देखे, ना कोई मोबाईल की खत्टपट, ना कोई अन्दर आये , ना कॊई तेल बेचे.... मोजा ही मोजा
धन्यवाद
भाई यह जो फ़ोटो लगा रखी है क्या ६० साल पहले की है,

प्रदीप मानोरिया said...

वाह मकरंद जी इधर चंद्र यान चाँद प् पहुंचा आपने हर चाँद को याद कर लिया वह मज़ा आगया

taanya said...

makrand ji...bahut badhiya..
idher chaand per rashtriye dhwaj fehraya ja raha hai aur idher aapke mobile me chand ki ring tone b aa gayi..bahut khoob

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

मज़ा आ गया मकरंद भाई!

seema gupta said...

चाँद बादलों में जा चुका था
और मुस्कुरा रही थी चाँदनी
"ha ha ha ha ha ha unpredictable thoughts, great sense of humour"

Regards

Akshaya-mann said...

areyyyyyyyy yaar kamal kar rahe ho..........
doti phad kyun rumal kar rahe ho.............
yahan par ek chand nasib nahi ho raha aur wahan tum na jane kitne chand ugaa rahe ho:)
bahut khub.....:)

aapka swagat hai....
"बदले-बदले से कुछ पहलू"
http://akshaya-mann-vijay.blogspot.com/

kkyadav said...

शाम ढलते तेरी जुल्फों से चाँद को झाँका, इतने में कम्भखत मोबाइल कांपा
आदत से मजबूर बटन दबाया आवाज आई ,चाँदनी की रिंग टोन मुफ्त उपलब्ध हे
sms कीजिये moon1234..
..............बेहतरीन प्रस्तुति !!!

makrand said...

bus check kiya blog chal raha ya nahi

विनय said...

you're really a good फण्डेबाज!

Renu Sharma said...

bahut sundar rachna hai ,
comment ke liye shukriya
renu

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

धन्यवाद......अब मिलते रहेंगे,
बढ़िया है.....

anu julka said...

ur style is amazing. n thanx fr visiting and commenting my blog.

रश्मि प्रभा said...

चांदनी का रिंग टोन........क्या बात है

PREETI BARTHWAL said...

बहुत ही मजेदार

Mumukshh Ki Rachanain said...

मकरंद भाई,
गजब की सोंच -शक्ति है आपके पास और उसे शब्दों के जाल में बुन कर लाजवाब रूप से पेश करने की शैली में भी लगता है कि आप को महारत हासिल है.

सुंदर अभिव्यक्ति की जितनी भी तारीफ की जाय कम है.

चन्द्र मोहन गुप्त

प्रदीप मानोरिया said...

आपकी कविता बहुत गंभीर भाव भरा होता है बहुत सुंदर प्रस्तुति