Tuesday, April 13, 2010

एजुकेसन

गाँव में शिक्षा के नाम पर
तमाशा जारी हे
शहरों में एजुकेसन के नाम पर
गोरख धन्दा
भारी हे

दीवारों पर लीखनेसे
कुछ नहीं होगा
कुत्ता टांग उठा के धो देगा
या फिर पढ़े लिखे

लोकतंत्र में
शिक्षा अब अधिकार हे
पर उजाला
फिर चंद लोगों में बटेंगा
इस देश में फिर एक भूखा जोकर बनेगा

Thursday, April 8, 2010

बिल बनाम पर्ची

सामान खरीद कर ,
जब हमने बिल माँगा
दुकानदार ने आँख तरेरी
मुस्कुराके हमको टाँगा

जो पर्ची पर लिखा हे
वही सही हें
पक्का चाहिए तो
अलग से लगेंगे

और वारंटी गारंटी
हमारी जबान हें
बरखुरदार
ये हिंदुस्तान हें

खोटे सिक्के यहाँ
बड़ी गाडियों में चलते हें
तुम्हारे जेसे बस स्टैंड से
उतरकर हम से उलझते हे

आगे की सोचो
कागज तो सिर्फ खाता बही हे
जबान हिलाए गा
तो खाना मिल पायेगा

कागज के भरोसे
तू कोरा कागज ही रह जायेगा

Friday, March 19, 2010

आदमी

हाथी सड़क पर ,
मद मस्त जा रहा था
कुत्ता भोंका,
हाथी को नागवार गुजरा
सूंड में लपेट कर जो
पटकनी दी,
कुत्ते की दुम सीधी हो गयी
कुत्ता माँयुस हो गया ,
बोला तोड़ देते ,
अगर मेरी टांग,
कुछ दिन में ठीक हो जाती
पर आपने ने तो
आदमी बना दिया ................

Monday, March 15, 2010

हार्दिक शुभ कामनायें

नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनायें
मोहब्बत अब दिल से नहीं
दिमाग से की जाती हे
जिम्मेदारी नहीं ली जाती हे

जियो और मरने दो का फार्मूला हे

गधे एक तरफ़ा मोहब्बत करते हे
घोड़े तो अस्तबल में मोंज करते हे
जमाना बदल रहा हे
रिश्तों में भावनायों का सूरज ढल रहा हे
अब नीम के पेड काट दिए जाते हे
क्यों की सामने वाली खिड़की के बीच में आते हे

Wednesday, March 3, 2010

सामाजिक फ्राड़ीये

अजब तमाशा
गजब हे खेल
दोस्ती की रेलमपेल

गिफ्ट कर रहे प्रदान
कागा गा रहे
प्यार की तान

नेटवर्किंग का जमाना हे
फोटो देखे के फ़साना हे
भोले भले फंसे रहे हे
ये सामाजिक फ्राड़ीये हंस रहे हैं

भावानायोँ की तिजारत जारी हैं
जिस्म की भूख सबसे भारी हे

Tuesday, March 2, 2010

स्मार्ट

गर्ल फ्रेंड बन संवर कर काफी पीने
क्लब में आये
साथ में कुछ फूल भी लाये
पर बीबी घूंघट में नज़र आये

हम तो करें मोबाइल पर घूटर घू
पर बीबी को फ़ोन लैंड लाइन पर भी नहीं आये

हम रात में भी पार्टी मनाएं
पर बीबी घर से बाहर न जाये

हम संवारे देश का भविष्य
कल का इतिहास
पर घर का भूगोल
पुराना ही नज़र आये

ऐशे सामाजिक फ्राड
लगा रहे आवाज़
हम आधुनिक हो रहे हें

Friday, February 12, 2010

बनियान

आदमी बनियान में
वो भी फटी
कुत्ता नेवी ब्लू स्वेटर में
कोहरे में लोकतंत्र
रसोई में सन्नाटा
पत्रिकाएँ नीला लिबास पहने
सरवे जारी हे
मनोरजन के नाम पर राजनीति जारी हे
वेलेंटाइन के कागा
बाँट रहे प्रेम का धागा
मोह्हबत में तिजारत जारी हे
शिक्षा का स्तर बढ गया हे
एड्स की सबको जानकारी हे