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जगह के हिसाब से बिकता हे
बापू की आढ़ में
इनका चेहरा दिखता
ये लोकतंत्र के रहनुमा हे
इन्हे पहचानो
यह थाने में ,मयखाने में
सर्वत्र व्याप्त हे
बापू के नाम की रोज खाते हे
लूट में इनकी हिसे दारी हे
विज्ञापन इनका पेशा हे
यह अब हर जगह नज़र आयेंगे
तुम सिर्फ़ ये याद रखना
बदलना हो वयवस्था
तो इन्हे साथ मत रखना
बस बापू की तस्वीर काफी हे
सच्चाई अभी बाकी हे ...........
इशिलिये आज भी हम बापू को याद करते हे
🌙ग़ज़ल - तुम्हारे हैं
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Happy New Year 5128 📅 "रौद्र" नामक संवत्सर पर सबको शुभकामनाएँ 🙏 *श्री
शालिवाहन शक 1948, युगाब्द 5128, संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुढीपड़वा,
नवरात्र...
1 day ago

7 comments:
ये लोकतंत्र के रहनुमा हे
इन्हे पहचानो
यह थाने में ,मयखाने में
सर्वत्र व्याप्त हे
बेहतरीन लिखा मकरंद सर ! धन्यवाद !
क्या बात है ? आज गांधी जयन्ती पर बेबाक रचना के लिए धन्यवाद !
बापू के नाम की रोज खाते हे
लूट में इनकी हिसे दारी हे
विज्ञापन इनका पेशा हे
यह अब हर जगह नज़र आयेंगे
बहुत गजब की रचना ! बधाई !
बापू के नाम के तुकडे चबाने वालो पर अच्छा व्यंग है !
बापू के नाम की रोज खाते हे
लूट में इनकी हिसे दारी हे
वाह सटीक !
तुम सिर्फ़ ये याद रखना
बदलना हो वयवस्था
तो इन्हे साथ मत रखना
बस बापू की तस्वीर काफी हे
'what a creative thought'
Regards
tikshan baan chalaaye hain.yun hi likhate rahen.
shubhkaamna ke saath
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