मेरा पुत्र सबेरे सबेरे गुन गुना रहा था
पप्पु कान्ट डान्स साला
फ़िर अगली पन्क्ति
पटियाला पैग लगा के मैं टल्ली हो गई
मैने पूछा ये क्या बोल रहे हो ?
कहने लगा बालीवुड सान्ग्स हैं
रास्ते मे मेरा मित्र बुद्धु मिला
मैने पूछा तुम्हारे नैनों मे दर्द दिख रहा है दोस्त
कहने लगा ममता का आंचल नैनों को नम कर देता है
इन बंधुओं ने अर्थ-व्यवस्था को टल्ली कर रखा है
राजनैतिक विदुषक रोज नया फ़लसफ़ा ला रहे हैं
लगता है पोलियो के टीके के वितरण मे कहीं भ्रष्टाचार है
जनता जनार्दन डान्स कर रही है
पर मेरा पप्पू जो चाहता भी है
पर कांट डांस
और अन्त मे दुष्यन्त कुमार के शब्द
समाज उनका भी अपराध लिखेगा
जो तटस्थ हैं ।
ग़ज़ल: सँवारे क्यों
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काम नहीं जो आने वाला, उसको कोई पुकारे क्यों।
बाज़ारों की इस बस्ती में, दिल को कोई निखारे क्यों॥
इस्तेमाल का दौर नया है, भोगें-फेंकें, चलो-टलो,
पीछे छोड़ा ज...
1 week ago






