व्यभिचार के पुतले
अवैध सम्भंधो के फाटक
रिश्ते हो गए मोबाइल
मेसेजों से मांग भराई
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
अकेलेपन का मजा
रिश्तों में तिजारत
बदन चाँदी के वर्क में लिपटा हुआ
और मन काजल की कोठरी में सिसकता हुआ
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
टूटते मोबाइल रिश्तों के बीच
अब लैंड लाइन जरूरी हे
सामाजिक एक्सचेंजोँ
आगे आओ
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
माँ ही जीवन का आधार हे
कलयुगी जांच मत कराइए
अगर अब नहीं संभले
तो दिन दूर नहीं , कुत्ता और आदमी
सड़क पर नज़र आयेंगे
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
प्रगति जरुरी हे
पश्चिमी दिशा मजबूरी हे
पर कुछ तो खुद की संसकृति
का पेटेंट कराईये
हिंदुस्तान बदल रहा हे ............
मैं भी एक कवि बन पाता - कविता
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*[अनुराग शर्मा]*
चित्र व कविता: अनुराग शर्माआग तुम्हारे अन्तर की मैं
अपने दिल में जला पाता
दर्द पिरो सकता सीने में
मैं भी एक कवि बन पाता
अन्धियारी यह रात...
5 days ago







9 comments:
हिन्दुस्तान बड़ी तेजी से बदल रहा है..बेहतरीन कहा..मकरंद. आजकल कम दिखते हो!!
thanks for boosting my confidence
प्रशंसनीय ।
अच्छा लिखा आपने...बधाई.
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'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.
नयी पोस्ट डालें ।
नयी पोस्ट डालेँ ।
bahut khoob...
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अरे वाह, मकरंद सेठ !
आप अच्छा लिखते हैं ...हार्दिक शुभकामनायें !
आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ
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