Tuesday, April 13, 2010

एजुकेसन

गाँव में शिक्षा के नाम पर
तमाशा जारी हे
शहरों में एजुकेसन के नाम पर
गोरख धन्दा
भारी हे

दीवारों पर लीखनेसे
कुछ नहीं होगा
कुत्ता टांग उठा के धो देगा
या फिर पढ़े लिखे

लोकतंत्र में
शिक्षा अब अधिकार हे
पर उजाला
फिर चंद लोगों में बटेंगा
इस देश में फिर एक भूखा जोकर बनेगा

7 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

बहुते सही कहा. आशीष ने बहुते इंतजार करायो. जय हो मकरंद सर की.

रामराम.

प्रवीण पाण्डेय said...

कुछ न कुछ तो सार्थक करना पड़ेगा ढोल पीटने के अतिरिक्त ।

सीमा सचदेव said...

एकदम सही कहा आपने , बातों से नहीं वास्तविक्ता में अमल होना चाहिए

अरुणेश मिश्र said...

सटीक ।

अरुणेश मिश्र said...

सटीक ।

प्रदीप मानोरिया said...

शिक्षा माफ़िआ पर नुकीला व्यंग बधाई
बहुत दिनो बाद मैं पुन: ब्लोग से जुद पाया हूँ अनुपस्तिथि के लिये क्षमा

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

नाइस वन ! व्यंग है ...पर दबंग है !!!!