सामान खरीद कर ,
जब हमने बिल माँगा
दुकानदार ने आँख तरेरी
मुस्कुराके हमको टाँगा
जो पर्ची पर लिखा हे
वही सही हें
पक्का चाहिए तो
अलग से लगेंगे
और वारंटी गारंटी
हमारी जबान हें
बरखुरदार
ये हिंदुस्तान हें
खोटे सिक्के यहाँ
बड़ी गाडियों में चलते हें
तुम्हारे जेसे बस स्टैंड से
उतरकर हम से उलझते हे
आगे की सोचो
कागज तो सिर्फ खाता बही हे
जबान हिलाए गा
तो खाना मिल पायेगा
कागज के भरोसे
तू कोरा कागज ही रह जायेगा
🌙ग़ज़ल - तुम्हारे हैं
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Happy New Year 5128 📅 "रौद्र" नामक संवत्सर पर सबको शुभकामनाएँ 🙏 *श्री
शालिवाहन शक 1948, युगाब्द 5128, संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुढीपड़वा,
नवरात्र...
1 day ago

3 comments:
बहुते सही कहा मकरंद सर.
रामराम.
पर्ची तो मिेली! कल हमने केमिस्ट की बड़ी दुकान से दवा खरीदी और उसके लिफाफे पर ही जोड़ कर दिया था कीमत का! :)
achha vyang hai..
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