डॉग कर रहे कैटवाक
कैट कर रही डॉग वॉच
कुछ नया कर दिखाना हे
न जमा विजातीय
सजातीय से काम चलाना हे
लीव इन का जमाना हे
विचारों को ,
सभ्यता , संस्कृति की लगाम दो
जवानी सिर्फ़ जिस्म की परेड नही हे
बुदापा इसे भी आना हे
जिस्म की नुमाइश के लिए
कई मंडियां हे
पगडंडियाँ हे
तुम इस रेम्प को सोसाईटी मत लायो
🌙ग़ज़ल - तुम्हारे हैं
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Happy New Year 5128 📅 "रौद्र" नामक संवत्सर पर सबको शुभकामनाएँ 🙏 *श्री
शालिवाहन शक 1948, युगाब्द 5128, संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुढीपड़वा,
नवरात्र...
1 day ago

9 comments:
यथार्थ और सटीक रचना। धन्यवाद।
बहुत लाजवाब मकरंद सर.
रामराम.
डॉग कर रहे कैटवाक
कैट कर रही डॉग वॉच
" ha ha ha ha shayad job exchange kr li hai aapas mey...great"
Regards
यह तो रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में तुलसी बाबा के लिखे कलयुग वर्णन सरीखा हो गया!
achhi hai........
तुम इस रैंप को..........
भई वाह... बहुत बधाई इस सामयिकता को...
डॉग कर रहे कैटवाक
कैट कर रही डॉग वॉच...
मकरंद जी बहुत सुंदर
धन्यवाद
बहुत सुंदर तीखा धारदार व्यंग वाह वाह मकरंद जी
प्रदीप मनोरिया 09425132060
http://manoria.blogspot.com
http://kundkundkahan.blogspot.com
डॉग कर रहे कैटवाक
कैट कर रही डॉग वॉच
कुछ नया कर दिखाना हे
न जमा विजातीय
सजातीय से काम चलाना हे
bahut khoob makarand bhai
bahut sateek aur vyangatmak
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