नव वर्ष की संध्या पर
मचा हुआ हे गोरख धंधा
डांस और मस्ती unlimited
विजातीय साथी होना जरुरी
विज्ञापनों की लहर
अखबारों में ऐसी
लगता हे इस रात की सुबह नही ......
कपल पास का जुगाड़ कीजिये
सवेरे नो दो ग्यारह हो जाइये
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
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कामरेड नाखुश हैं हमसे, मंदिर-मस्जिद वाले भी
मज़दूरों के नेता नाखुश, नाखुश उनके लाले भी॥
नाशादों को शाद करूँ, यह सोच रहा हूँ कुछ दिन से
जले दिलों के इस जग मे...
1 week ago
