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Wednesday, November 5, 2008

मदारी

बम्बई जल चुका
मुंबई जल रहा हे
फुटपाथ पर आदमी
दर दर पिघल रहा हे

मदारी फिर शहर
में आने लगे हे
सापों को दूध और बांसुरी
से रिझाने लगे हे

समेटे कर अपना
ये चले जायेंगे
डसने के लिए
इन्हे छोड़ जायेंगे

तुम मदारी को
पकडो
साँप ख़ुद ब ख़ुद
बिल में चले जायेंगे