लोकतंत्र के खंभे पर
ये टेड़े खड़े हो जाते हैं !
जन्म से तो हैं वफादार
पर संगत में बिगड़ जाते हैं !
अब मौसम भी आ रहा है
झुंड के झुंड में नजर आयेंगे !
जिसकी भी स्किल (skill) होगी
वो कर्मवीर पा जायेगा !
कुछ फेयर हैं कुछ लवली
किसकी किस्मत में बन्टी और बबली
ये तो वक्त बताएगा ताऊ !!
पर लोकतंत्र हमेशा मुस्कराएगा
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
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कामरेड नाखुश हैं हमसे, मंदिर-मस्जिद वाले भी
मज़दूरों के नेता नाखुश, नाखुश उनके लाले भी॥
नाशादों को शाद करूँ, यह सोच रहा हूँ कुछ दिन से
जले दिलों के इस जग मे...
1 week ago
