सुना जैसे ही
फिर कोई बम फटा
फिर कोई जवानी
बेवा हो गई
इश्क की मधुमक्खी ने फिर काटा
हमे बड़ा गुमान था
वोटर लिस्ट में नाम था
शहद सी मीठी जुबां हो गयी
सफ़ेद वस्त्रों की केंचुली धारण कर
हम उसके दरवाजे पहुंचे
अंदर से आवाज आयी
बम लगाने वाला उसका भाई था
साक्षात्कार
-
तुम्हें निर्मल देखना चाहता हूँ मैं,
विशुद्ध रूप, न कोई आभूषण,
न प्रसाधन, न भूमिका, न रंग-रोगन
मात्र तुम, अपने अस्तित्व की प्रथम ध्वनि जैसी।
एक बार तुमसे मिल...
2 weeks ago

13 comments:
मकरंद साहब बहुत ही मार्मिक रचना है आपकी अच्छे भाव हैं
भाई? सम्बन्धों के मायने खत्म होते जा रहे हैं।
सफ़ेद वस्त्रों की केंचुली धारण कर
हम उसके दरवाजे पहुंचे
अंदर से आवाज आयी
बम लगाने वाला उसका भाई था
aaj ka satya hai yahi,bahut khub
श्क की मधुमक्खी ने फिर काटा
हमे बड़ा गुमान था
वोटर लिस्ट में नाम था
शहद सी मीठी जुबां हो गयी
बहुत लाजवाब मकरंद सर !
गजब, बहुत बेहतरीन!!
बहुत बेहतरीन रचना है।बधाई स्वीकारें।
यही रूप है राजनीति का बहुत सटीकता से व्याख्यान किया है.....
बहुत अच्छे........
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑
सब कुछ हो गया और कुछ भी नही !!
मेरी शुभकामनाये आपकी भावनाओं को आपको और आपके परिवार को
आभार...अक्षय-मन
भाई बहुत ही भाव पुर्ण ओर मार्मिक कविता के लिये बुत बहुत धन्यवाद
सफ़ेद वस्त्रों की केंचुली धारण कर
हम उसके दरवाजे पहुंचे
अंदर से आवाज आयी
बम लगाने वाला उसका भाई था
"ओह बहुत भावनात्मक रचना, घर के चिराग ने ही घर फूंक डाला "
Regards
बहुत सुंदर रचना है.
वाह बहुत खूब लिखा है आपने.
नमस्कार, उम्मीद है की आप स्वस्थ एवं कुशल होंगे.
मैं कुछ दिनों के लिए गोवा गया हुआ था, इसलिए कुछ समय के लिए ब्लाग जगत से कट गया था. आब नियामत रूप से आता रहूँगा.
सामयिक स्थितियों पर तीखा व्यंग्य है । बधाई ।
भयंकर बात सहज शब्दावली मज़ा आ गया आपका चिंतन बहुत गहरा है
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